Thursday, November 16, 2017

17 साल बाद भी क्यों ‘गैर’ है ‘गैरसैंण’

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गैरसैंण एकबार फिर से सुर्खियों में है। उसे स्थायी राजधानी का ओहदा मिल रहा है? जी नहीं! अभी इसकी दूर तक संभवनाएं नहीं दिखती। सुर्खियों का कारण है कि बर्तज पूर्ववर्ती सरकार ही मौजूदा सरकार ने दिसंबर में गैरसैंण में एक हफ्ते का विधानसभा सत्र आहूत करने का निर्णय लिया है। जो कि सात से 13 दिसंबर तक चलेगा। विस सत्र में अनुपूरक बजट पास किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। तो दूसरी तरफ गैरसैंण पर सियासत भी शुरू हो गई है। 

Wednesday, November 01, 2017

उत्तराखंड में एक और फूलों की घाटी ‘चिनाप’

विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी से तो हर कोई परिचित है। लेकिन इससे इतर एक और फूलों की जन्नत है चिनाप घाटी। जिसके बारे में शायद बहुत ही कम लोगों को जानकारी होगी। सीमांत जनपद चमोली के जोशीमठ ब्लाक में स्थित है कुदरत की ये गुमनाम नेमत। जिसका सौंदर्य इतना अभिभूत कर देने वाला है कि देखने वाला इसकी सुंदरता से हर किसी को ईर्ष्या होने लगे।

Monday, October 30, 2017

शिकायतें तब भी थीं, अब भी हैं

 उत्तराखंड अलग राज्य बनने से पहले यूपी सरकार को लेकर जितनी शिकायतें पर्वतजनके मानस पर अंकित थीं, उससे कहीं अधिक शिकायतें हल होने के इंतजार में अपनी ही सरकारों का मुहं तक रही हैं। कारण, 17 वर्षों में निस्तारण की बजाए उनकी संख्या ज्यादा बढ़ी है। जिसकी तस्दीक सरकारी आंकड़े करते हैं। यानि कि राज्य निर्माण की उम्मीदें अब तक के अंतराल में टूटी ही हैं।

Saturday, October 28, 2017

सिर्फ आलोचना करके तो नहीं जीत सकते

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उत्तराखंड क्रांति दल खुद को अपनी आंदोलनकारी संगठनकी छवि से मुक्त कर एक जिम्मेदार और परिपक्व राजनीतिक पार्टी के रूप में स्थापित करना चाहता है। इसके पीछे निश्चित ही उसके तर्क हैं। जिन्हें अनसुना तो कम से कम नहीं किया जा सकता है। मगर, अतीत में आंदोलनकारी संगठन और फिर सियासी असफलताओं के आलोक में उसके लिए मनोवांछित कायाकल्पआसान होगा?

Saturday, October 21, 2017

जहां बिखरी है कुदरत की बेपनाह खूबसूरती

उत्तराखंड के हिमालय में कई छोटे-बड़े बुग्याल मौजूद हैं। औली, गोरसों बुग्याल, बेदनी बुग्याल, दयारा बुग्याल, पंवालीकांठा, चोपता, दुगलबिट्टा सहित कई बुग्याल हैं, जो बरबस ही सैलानियों को अपनी और आकर्षित करते हैं। लेकिन इन सबसे अलग बेपनाह हुस्न और अभिभूत कर देने वाला सौंदर्य को समेटे सीमांत जनपद चमोली के देवाल ब्लाक में स्थित आली बुग्याल आज भी अपनी पहचान को छटपटाता नजर आ रहा है। प्रकृति ने आली पर अपना सब कुछ लुटाया है, लेकिन नीति नियंताओं की उदासीनता के कारण आज आली हाशिए पर चला गया है।

Friday, October 20, 2017

ओ साओ ! तुम कैक छा ?

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पहाड़ के रसूल हमताजोव हैं शेरदा अनपढ़

तुम सुख में लोटी रया,
हम दुःख में पोती रयां !

तुम स्वर्ग, हम नरक,
धरती में, धरती आसमानौ फरक !

Wednesday, October 18, 2017

दाज्यू मैं गांव का ठैरा


पहाड़ में रहता हूं गांव का ठैरा
दाज्यू में तो पीपल की छांव सा ठैरा

ओल्ले घर में हाथ बना है
पल्ले घर नेकर और डंडा 
मल्ले घर में हाथी आया
तल्ले घर कुर्सी का झण्डा

Tuesday, October 17, 2017

ग़ज़ल

तुम्हारे पांव के नीचे कोई जमीन नहीं,
कमाल ये है कि फिर भी तुम्हें यकीन नहीं ।।

मैं बेपनाह अंधेरों को सुबह कैसे कहूं,
मैं इन नजारों का अंधा तमाशबीन नहीं ।।

तेरी जुबान है झूठी जम्हूरियत की तरह,
तू एक जलील-सी गाली से बेहतरीन नहीं ।।