Recent Post

Monday, August 28, 2017

सिर्फ भाषणों और नारों से नहीं बचती बेटियां!

जिस पर बेटियों के साथ दुराचार व हत्या के आरोप में सीबीआई जांच के बाद न्यायालय में मुकदमा चल रहा हो, ऐसे व्यक्ति को देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी स्वच्छता अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाते हैं। उनकी पार्टी सत्ता में आने के लिए ऐसे व्यक्ति के साथ वोटों का सौदा करती है। वोटों के सौदे से चुनाव जीतने के बाद उनकी पार्टी के कई बड़े नेता दुराचार के आरोपी के घर में मत्था टेकने जाते हैं।

Thursday, August 24, 2017

कैसा है कीड़ाजड़ी का गोरखधंधा

http://bolpahadi.blogspot.in/
देवभूमि उत्तराखंड अपनी नैसर्गिकता के साथ ही प्राकृतिक संपदा से भी परिपूर्ण है। इसी संपदा में शामिल हैं वह हजारों औषधीय पादप, जो आज के दौर में भी उपयोगी हैं। यही कारण है कि आज भी चिकित्सा की आयुर्वेदिक पद्धति के शोधकर्ता हिमालय का रुख करते हैं। खासबात कि यह सब पहाड़ की पुरातन परंपरा का हिस्सा हैं। गांवों में जानकार बुजुर्ग आज भी अपने आसपास से ही इन्हीं औषधियों का उपयोग कर लेते हैं। चीन और तिब्बत में कीड़ाजड़ी परंपरागत चिकित्सा पद्धित का हिस्सा है।

Friday, August 18, 2017

वीर भड़ूं कू देस बावन गढ़ कू देस

http://bolpahadi.blogspot.in/
वीर भड़ूं कू देस बावन गढ़ कू देस..., प्रख्यात लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी का यह गीत सुना ही होगा। जी हां! गढ़वाल को 52 गढ़ों का देश भी कहा जाता है। इस परिक्षेत्र में 52 राजाओं के आधिपत्य वाले यह राज्य तब स्वतंत्र थे। इनके अलावा भी गढ़वाल हिमालय क्षेत्र में थोकदारों के अधीन छोटे अन्य गढ़ भी थे। छठी शताब्दी में भारत में आए चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी इनमें से कुछ का जिक्र किया था।

Thursday, August 17, 2017

यहां है दुनिया का एकलौता 'राहू मंदिर'


http://bolpahadi.blogspot.in/
कभी नहीं सुना होगा कि देश के किसी गांव में देवों के साथ दानव की पूजा भी हो सकती है। आश्चर्य होगा सुन और जानकर कि उत्तराखंड के एक गांव में भगवान शिव के साथ राहू को भी पूजा जाता है। इस मंदिर में भोलेनाथ शिव के साथ राहू की प्रतिमा भी स्थापित है। इस मंदिर को देश ही नहीं दुनिया का भी एकमात्र राहू मंदिर माना जाता है।

Thursday, August 10, 2017

कब खत्म होगा युवाओं का इंतजार ?

 http://bolpahadi.blogspot.in/
उत्तराखंड आंदोलन और राज्य गठन के वक्त ही युवाओं ने सपने देखे थे, अपनी मुफलिसी के खत्म होने के। उम्मीद थीं कि नए राज्य में नई सरकारें कम से कम यूपी की तरह बर्ताव नहीं करेंगी, उन्हें रोजगार तो जरूर मिलेगा। जिसके लिए वह हमेशा अपने घरों को छोड़कर मैदानों में निकल पड़ते हैं। सिलसिला आज भी खत्म नहीं हुआ है। वह पहले की तरह ही घरों से पलायन कर रहे हैं। गांव की खाली होने की रफ्तार राज्य निर्माण के बाद ज्यादा बढ़ी। सरकारी आंकड़े ही इसकी गवाही दे रहे हैं। ऐसा क्यों हुआ? जवाब बहुत मुश्किल भी नहीं।

Sunday, August 06, 2017

आखिर क्या मुहं दिखाएंगे ?


किचन में टोकरी पर आराम से पैर पसारे छोटे से टमाटर को मैं ऐसे निहार रहा था, जैसे वो शो-केस में रखा हो। मैं आतुर था कि उसे लपक लूं। इतने में ही बीबी ने कहा- अरे! क्या कर रहे हो, ये एक ही तो बचा है। कोई आ ही गया तो क्या मुहं दिखाएंगे? आजकल किचन में टमाटर होना प्रेस्टीज इश्यू हो गया है। पूरे 100 रुपये किलो हैं।

Saturday, August 05, 2017

वह दूसरे जन्म में पानी को तरसती रही

एक परिवार में दो महिलाएं जेठानी और देवरानी रहती थी। जेठानी बहुत दुष्ट और देवरानी शिष्ट, सौम्य, ईमानदार व सेवा भाव वाली थी। दोनों के ही कोई संतान नहीं थी। देवरानी जो भी कमाकर लाती, वह अपनी जेठानी को सौंप देती और दुःख-दर्द के वक्त पूरे मनोयोग से उसकी सेवा करती। ताकि दोनों में प्रेम भाव बना रहे। किंतु देवरानी के इतना करने के बाद भी जेठानी हर समय नाराज रहती, उसके साथ किसी भी काम में हाथ नहीं बंटाती।

Tuesday, August 01, 2017

फिर जीवंत हुई ‘सयेल’ की परंपरा

हरियाली पर्व हरेलाकी तरह पहाड़ के लोकजीवन में धान की रोपाई के दौरान निभाई जाने वाली सयेलकी परंपरा भी हमारे पर्वतीय समाज में सामुहिकता के दर्शन कराती है। हरेला को हमने हाल के दिनों में सरकारी आह्वान पर कुछ हद तक अपनाना शुरू कर दिया है। मगर, सयेल की परंपरा कहीं विस्मृति की खोह में जा चुकी है। यह खेती से हमारी विमुखता को दर्शाती है। हालांकि पिछले दिनों यमकेश्वर विकास खंड के गांव सिंदुड़ी के बैरागढ़ तोक में बुजुर्ग कुंदनलाल जुगलाण की पहल पर जरूर इसे दोबारा से चलन में लाने की कोशिश हुई है।