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Wednesday, October 21, 2015

हे रावण


रावण
तुम अब तक जिंदा हो,
तुम्हें तो मार दिया गया था त्रेता में. ...
उसके बाद भी
सदियों से तुम्हें जलाते आ रहे हैं हम....
तब भी जिंदा हो...
रावण आखिर बताओ तो,
कब और कैसे मरोगे तुम. ...


सर्वाधिकार@धनेश कोठारी
08/09/2014

Saturday, October 17, 2015

जै दिन

जै दिन

जै दिन
मेरा गोरू
तेरि सग्वाड़यों, तेरि पुंगड़यों
उजाड़ खै जाला
जै दिन
झालू कि काखड़ी
चोरे जालि

Tuesday, October 06, 2015

जब प्रेम में जोगी बन गया एक राजा

राजुला-मालूशाही पहाड़ की सबसे प्रसिद्ध अमर प्रेम कहानी है। यह दो प्रेमियों के मिलन में आने वाले कष्‍टों, दो जातियों, दो देशों, दो अलग परिवेश में रहने वाले प्रेमियों का कथानक है। तब सामाजिक बंधनों में जकड़े समाज के सामने यह चुनौती भी थी। यहां एक तरफ बैराठ का संपन्‍न राजघराना रहा, वहीं दूसरी ओर एक साधारण व्‍यापारी परिवार। तब इन दो संस्कृतियों का मिलन आसान नहीं था। लेकिन एक प्रेमिका की चाह और प्रेमी के समर्पण ने प्रेम की ऐसी इबारत लिखी, जो तत्‍कालीन सामाजिक ढांचे को तोड़ते हुए नया इतिहास रच गई।

Monday, October 05, 2015

वुं मा बोली दे

गणेश खुगसाल 'गणी' गढ़वाली भाषा के लोकप्रिय और सशक्त कवि हैं। 'वुं मा बोली दे' उनकी प्रकाशित पहली काव्यकृति है। शीर्षक का अर्थ है उनसे कह देना। किस से कहना है और क्या कहना है, ये पाठक स्वयं तय करें। संग्रह की कविताएँ पहाड़ के गांव की माटी की सौंधी महक से लबरेज हैं। सांस्कृतिक क्षरण को प्रतिबिंबित करती ये कविताएँ, सोचने पर विवश करती हैं।

बकौल कवि वे वर्ष 1983-87 से कविता लिख रहे हैं, परन्तु उनका पहला काव्य संग्रह अब प्रकाशित हो रहा है।