लम्बी लड़ाई के बाद खामोश पहाड़ों में खौफनाक मौन आसपास पसर चुका है। यहां मौन टुटने से पहले कलाबाजियों की काबलियत से अंधो में बंटवारा जारी है। चकड़ैतों में नोबेल गांठने का उतावलापन है। और भी बहुत जो आंखें देख रही हैं, दिमाग समझ रहा है, मन मान भी रहा है, लेकिन मौन तब भी कायम है। एक कोशिश इस मौन को तोड़ने की...... तुम्हारे शब्द/मेरे शब्दों से मिलते हैं/हमारा मौन /टुटता भी नजर आता है/हम अपनी मांद से निकलें/तो बात बन जाये.....
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