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Monday, July 11, 2011

गौं तलक

सड़क पौंछिगे मेरा गौं
मोटर, कार, गाड़ी
फैशन, नै रौ रिवाज
फास्‍ट फूड, बर्गर
हिन्दी, अंग्रेजी
ज्यांकू ब्वल्दन् बल कि
सौब धाणि
पौंछिगे मेरा गौं

नि पौंछी सकी त्.....
पाणि, धाणि
टीबी कू इलाज
जौ-जंगळूं कू हक
सर्‌करी इस्कूला मास्साब
हौळ-बळ्द, लाट-जू, जुड़ू
अर हौरि बि
जू मैं बिसरिग्यों,
तुम याद होलू
क्य बिगास यांकू ई ब्वलदन...?

सर्वाधिकार-: धनेश कोठारी

Sunday, July 10, 2011

सहकार से बचेंगी लोकभाषायें

उत्तराखण्ड भाषा संस्थान ने पिछले दिनों राजधानी देहरादून में लोकभाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए तीन दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया। सरकार ने जिस मंशा से इसे किया था, उसे समझने में किसी को ज्यादा दिमागी जमाखर्च करने की जरूरत नहीं है। लोकभाषाओं पर सरकार की चिंता से सभी वाकिफ हैं। वैसे भी लोकभाषायें सरकार से नहीं, सहकार से बचेंगी। उसके लिए ओएनजीसी के हॉल में सम्मान समारोह नहीं, बल्कि जौनसार और अस्कोट के उस लोक को बचाने की जरूरत है जो अब समाप्त हो रहा है।
इन भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सरकारी प्रोत्साहन का जहां तक सवाल है, इसी सरकार ने विधानसभा में पारित लोकभाषा बिल को कुछ लोगों के हडक़ाने पर वापिस ले लिया था। पिछले साल सरकार ने स्थानीय भाषा-बोलियों को समूह ‘ग’ की सेवाओं में शामिल करने का मसौदा तैयार किया था। लेकिन बाद में कुछ मंत्रियों और विधायकों के दबाव में इसे वापस लेना पड़ा। अफसोसजनक बात यह है कि जिस मंत्री ने इस विधेयक का सबसे ज्यादा विरोध किया, वही इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इतने बड़े सम्मेलन में किसी की हिम्मत नहीं हुई कि वह मदन कौशिक से पूछ सके कि वह किस मुंह से लोकभाषा की बात कर रहे हैं। सवाल तो मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ और प्रकाश पंत से भी किया जाना चाहिए था, लेकिन यह लोकभाषा पर सवाल करने का नहीं, इसी बहाने सम्मान पाने का समारोह था। मुख्यमंत्री से और भी काम पड़ते रहते हैं। इसलिए यह मान लेना चाहिए कि कुछ तो अच्छा हो रहा है।

उत्तराखण्ड में लोकभाषाओं पर बहस की बात नई नहीं है। संविधान की आठवीं अनुसूची में इसे शामिल करने के लिए लंबे समय से मांग की जा रही है। विभिन्न संगठनों और क्षेत्रीय समाचार माध्यमों ने इसे एक अभियान के रूप में चलाया। जब भी यह बातें आगे बढ़ीं, सरकार और राष्ट्रीय स्तर के ‘पहाड़ी’ साहित्यकारों ने अपनी टांग अड़ा दी। इस सम्मेलन में एक प्रतिष्ठित हिंदी के साहित्यकार ने तो ‘उत्तराखण्ड’ शब्द पर ही एतराज जता दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें ‘उत्तरांचल’ शब्द ही अच्छा लगता है। उत्तराखण्ड के सरोकारों से दूर इन साहित्यकारों से प्रमाणपत्र की आवश्यकता न होते हुए भी सार्वजनिक तौर पर दिये गये उनके इस बयान को इसलिए गंभीरता से लिया जाना चाहिए क्योंकि वो भी पुरस्कार बांटने वालों में से एक थे। उनसे यह भी सवाल किया जाना चाहिए कि उनकी बात मान भी ली जाये तो क्या उत्तरांचल शब्द से कुमाऊनी, गढ़वाली या जौनसारी भाषा का उद्धार हो जायेगा? असल में वे हमेशा लोकभाषाओं को हिंदी के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते रहे हैं। लोकभाषाओं को खतरा बताने वाले लोग लोकभाषा सम्मेलन के अतिथि के रूप में शामिल होंगे तो समझा जा सकता है कि हम किस दिशा में जा रहे हैं। एक और प्रतिष्ठित साहित्यकार इस सम्मेलन को धन्य कर गये। उन्होंने माफी मांगी कि वह तैयारी करके नहीं आये हैं। तैयारी करके भी आते तो क्या हो जाता। वे अपनी समझ या लोकभाषाओं के प्रति दृष्टिकोण तो नहीं बदलते। राष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त होने के बाद वे कुमाऊनी, गढ़वाली या जौनसारी की वकालत कर अपने को छोटा क्यों करते। बाद में जैसा उन्हें समझ में आया बोले भी। उन्होंने कहा कि हमें कुमाऊनी-गढ़वाली के चक्कर में पडऩे की बजाय एक विश्व भाषा पर बात करनी चाहिए।

लोकभाषा पर आयोजित इस सम्मेलन के ये कुछ फुटकर उदाहरण हैं। इसके अलावा भी बहुत कुछ हुआ। ऐसा होना कोई अनहोनी नहीं है। सरकार इस तरह के आयोजन अपनी उपलब्धियों में शामिल होने के लिए करती है। जो असल सवाल है वह लोकभाषाओं के प्रति हमारे पक्ष का है। उस पक्ष को तय न करने का संकट हम सबके बीच है। कुछ लोगों ने इस सम्मेलन में बहुत तरीके से भाषा के संवर्धन और संरक्षण के सवाल भी उठाये। कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रो. देवसिंह पोखरिया ने जिस सवाल को उठाया, वह लोकभाषाओं-बोलियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। अस्कोट में वनरावतों के बीच बोली जाने वाली राजी भाषा को बोलने वाले कुल ३५० लोग बचे हैं। यह भाषा एक पूरी संस्कृति की वाहक है। उसका लिखित साहित्य भी नहीं है। इसी तरह लगभग आधा दर्जन बोलियां हैं, जो धीरे-धीरे समाप्त हो रही हैं। कुमाऊनी, गढ़वाली और जौनसारी के कई शब्द समाप्त हो रहे हैं। इसके पीछे के कारणों और उस लोक को बचाने के बारे में भी सोचना होगा जहां भाषा और संस्कृति पुष्पित-पल्लवित होती है। लोकभाषा के साथ कुछ जुडऩा और छूटना अलग बात है, लेकिन उसे संरक्षित करने की ईमानदार पहल होनी चाहिए। अधिकतर विद्वानों का मानना है कि लोकभाषाओं को पाठ्यक्रम में लागू किया जाना चाहिए। इस तरह की मांग का स्वागत किया जाना चाहिए। जब हम इस तरह की बातें करते हैं तो हमें वस्तुस्थिति से भी अवगत होना चाहिए। मौजूदा समय में उत्तराखण्ड में सरकारी स्कूलों की हालत खस्ताहाल है। पिछले दिनों सरकार ने छह सौ से अधिक प्राइमरी स्कूलों को बंद किया है। जिन गांवों के इन स्कूलों को छात्रविहीन बताया गया है, वहीं खुले पब्लिक स्कूलों में बच्चों की भारी संख्या है। इन पब्लिक स्कूलों में स्थानीय भाषाओं के लिए कोई स्थान नहीं है, इसलिए लोकभाषा के सवालों पर बात करते समय पुरस्कारों और सरकारी आयोजनों का मोह छोडऩा जरूरी है। मौजूदा सरकार लोकभाषा विरोधी है, जिन लोगों से संघर्ष है, उन्हीं से दोस्ती खतरनाक होती है। लोकभाषा की चिंता करने वाले विद्वान अगर प्रतीकात्मक रूप से भी लोकभाषा विधेयक को वापस लेने वाली सरकार के सम्मान को वापस कर देते तो आधी लड़ाई हम जीत लेते। आखिर हम कौन होते हैं बोलने वाले। बोलेंगे विद्वान, सुनेंगे विद्वान, चिंता करेंगे विद्वान और उन्हें प्रोत्साहन देगी सरकार।             
आमीन!
चारु तिवारी
कार्यकारी सम्पादक
जनपक्ष आजकल

सौजन्य -: http://charutiwari.merapahad.in/how-to-save-uttarakhandi-local-languages/

Friday, July 01, 2011

ब्योली नवांद दैन्कू मांगळ गीत

Bathing after   Haldi Hath by Bride : A Garhwali Wedding Folk Songs                

( Nayand Dain ku  Mangal )
(Garhwali Wedding Folk Songs, Himalayan Wedding Folk Songs)

Wedding Folk Songs are very important aspects of Garhwali culture. There is folk song for each stage of Garhwali wedding.

However, marriage or singing, dancing in wedding ceremony is common in most of the community all over world.

Take the example of Palestine, there are many folk songs sung at the wedding time in groom’s house and bride’s house as well. The Henna application on Bride’s face and on other part is very essential aspect of Palestine community, On that occasion the community members sing  various types of Wedding folk Songs . N.Azam provides the example of Henna application in Palestine.

Wedding Folk Songs of Palestine

“They put henna on the brides but left out my hands”
“How wonderful it is to sleep among the girls”
“They put henna on the brides but left out my fingers”
“How wonderful it is to sleep among the little girls”

(Reference : Na’ela Azzam Libbes, The Palestine Wedding Practices and Rituals; This Week in Palestine, Issue 105, 2007)

Wedding Folk Song and Dance in Anatolia

 In Anatolia , the bride sits on cushion , the Henna is put in silver bowl and The   unmarried women applies Henna on left hand of the bride and married woman applies Henna on bride’s right hand. The guest, family members sing, dance with enthusiasm. Havalar Ayaz song is very popular wedding folk songs of Turkey

Wedding songs of Baluchistan

In Baluchistan, there is festive occasion while Henna application (decoration of Henna on Bride’s body) is there win wedding performances. The women sing various types of songs related to Henna application

Wedding Folk Songs of Bulgaria , Europe

In Bulgaria marriage ceremony is very important and there is folk song, dances in wedding performances and rituals are also sung  Astargya , Blacha, Buchimish, BavnaMelodija are a couple of famous titles of wedding songs of Bulgaria.

Chinese Wedding Folk Songs (Feng )  and Dance

Chinese have philosophical wedding culture and is full of traditions and rituals. The wedding songs, music is primary music in China. Chinese wedding folk music is very diverse, and songs provide joyful feeling, slow, at times sad feelings an d romantic at other times as also happens in Garhwali wedding performances. In this occasion, there is always wedding music tune which is different than funeral music tune or dragon boat race.

Wedding Folk Music in Africa 

As in Garhwal, Kumaun of Uttarakhand (India) the wedding marriage is not the relationship between the bride and groom but is seen more like a combining two families together. Therefore, in most of regions, there are wedding folk songs, dances in Africa.

Famous Irish Wedding Folk Songs

In Irish wedding is a social ceremony. The family member s sing song and dance with joy . the following folk song is very popular song of Irish wedding tradition

“She wears my ring to show the world
That she belongs to me
She wears my ring to tell the world
She’s mine eternally”…………….

…………………….. “She swears to wear it…….
“With eternal devo-otion
“That’s why I sing”
“Because she wears my ri-i-ing”

Garhwali Wedding Folk Songs at the time of Bride Ttaking Bath 

( Nayand Dain ku  Mangal )

As mentioned above that there are songs in each dtage of Garhwali wedding . When there is Haldi Hath (Ban Deen) then there is bathing (Nayan) of bride or groom at their respective home. When bride takes bath by water (no soap is allowed) with the help of her friends inside the room and outside on the country yard   , the singers sing folk song and the Das play drums etc. The music is slow but very soothing to ear.

The song is symbolic and the song narrates about goddess Parvati taking bath in the pond.          

क्यान कुण्डी कौज्याळ ह्वाए s s s
क्यान कुण्डी कौज्याळ ह्वाए s s s

मथि देश द्यो नि बरखो s s s
मथि देश द्यो नि बरखो s s s

क्यान कुण्डी कौज्याळ ह्वाए s s s
क्यान कुण्डी कौज्याळ ह्वाए s s s

सुरया धुमेलो ह्वाई s s s
सुरया धुमेला ह्वाए s s s

मथि कुण्डी पारबती नयाए s s s
मुडी कुण्डी कौज्याळ ह्वाए s s s

ईं ब्योली रंग चढ़ावा ए s s s
ईं ब्योली रंग चढ़ावा ए s s s

सबि कनियों दगड्या बुलावा ए s s s
सबि कनियों दगड्या बुलावा ए s s s


Reference:
Totaram Dhoundiyal, Mangal, Dhad Prakashan, Dehradun
Copyright @ Bhishma Kukreti,

हल्दी लगाण दें मांगळ गीत

Garhwali Wedding Folk Song at the time of Turmeric Past Application
(Garhwali Folk Songs, Himalayan Folk Songs, Indian Folk Songs )
Online Presentation : Bhishma Kukreti
Offline Presentation: Tota Ram Dhoundiyal ,Shrimati Shalija Thapliyal  'Mangal' published by Dhad Prakashan , Dehradun

After Ban Deen performance the women apply the turmeric paste on each part of bride or groom. Other women and the professional singer sing the Mangal Song or auspicious song
In this song. there is description of growing the turmeric or hwo the turmeric is grown in the field .However, the deities are in involved agricultural activities in the song. The song show the attachment of Garhwalis to the agricultural activities and the importance of agriculture.


कैन हल्दी साए ह्वेलि कैन हल्दी बाए ह्वेलि  s s s
कैन हल्दी साए ह्वेलि कैन हल्दी बाए ह्वेलि  s s s

मादेव जीन सायो छौ बायो छौ s s s
मादेव जीन सायो छौ बायो छौ s s s

पारबती जीन न्युलो छौ ग्वाड़ो छौ s s s
पारबती जीन न्युलो छौ ग्वाड़ो छौ s s s

कैन हल्दी त्वे रंग चढायो s s s
कैन हल्दी त्वे रंग चढायो s s s

पंचनाम दिव्तौन मैं रंग चढायो s s s
पंचनाम दिव्तौन मैं रंग चढायो  s s s

Regards
B. C. Kukreti